Category: डायरी

बचपन

बच्चा बड़ा कब से माना जाये ? जब से उसके अंदर ग्रंथियाँ पड़ने लगें, अपने पराये की ।

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अहंकार

धर्म का भी अहंकार होता है , और उसका नाम है अधर्म , तो अधर्म का अहंकार कितना भयानक होगा !!

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सुख/संतोष

सुख की चाहना द्वंद पैदा करती है, संतोष की चाहना शांति । (श्रीमती दीपा)

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सत्य

प्रियजन तो हमारे बारे में झूठ ही बोला करते हैं । सत्य तो सिर्फ दुश्मन ही बोल सकता है ।

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हंसी

जो दूसरों पर हंसता है, वह मूर्ख है, जो अपने पर हंसता है, वह समझदार है, जो दु:ख में हंसता है, वह संत है ।

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बुद्धि

बुद्धि मिलती है भाग्य से, और बढ़ती है विनय तथा अभ्यास से ।

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भाग्य

कर्म, भाग्य, पुरुषार्थ – ये सब पर्यायवाची हैं । (श्रीमति महेन्द्री)

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मंगल आशीष

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