Category: डायरी
उत्तम तप धर्म
तप यानि इच्छाओं का निरोध जैसे चाय छोड़ना आसान है चाय की चाह छोड़ना मुश्किल, पहले चाह छोड़नी है तब चाय छोड़ें । आचार्य श्री
उत्तम संयम धर्म
संयम का मतलब होता है – आलंबन, बंधन । जैसे लता ,पेड़ के सहारे ,थोड़ा सा बंधन पाकर ,उन्नति को प्राप्त करती है, फलती फूलती है
उत्तम सत्य धर्म
सत्य परेशान होता है पर अंत में जीत सत्य की ही होती है । जैसे फिल्म में हीरो ढ़ाई घंटे पिटता है और आखिर के
उत्तम शौच धर्म
शौच यानि पवित्रता । पवित्रता कैसे आती है ? जब हमारे मन से लोभ कम होता है, असंतुष्टि, आकांक्षायें, अतृप्ति कम होती हैं । पवित्रता
उत्तम आर्जव धर्म
यानि मायाचारी का उल्टा, सरलता का धर्म । हम ये सोचते हैं की मायाचारी करके हम फायदे में हो जायेगें, कुछ समय तक तो अपने
उत्तम मार्दव धर्म
मान करने से नीच गोत्र का बंध होता है, अपनी प्रशंसा, दूसरों की निंदा करना भी मान का ही रूप है। मान को अपने जीवन
उत्तम क्षमा धर्म
Meditation Purifies Mind, Prayer Purifies soul, Charity Purifies Wealth, Fast Purifies Health, And Forgiveness purifies Relations…
सहनशीलता
झील को पत्थर स्वीकार तो करने होंगे , पर तरंगे न उठें । उठें ,तो पीछे हट जाओ; फिर पत्थर का आवाह्न करो । ब्र.
सांसारिक/आत्मिक सुख
खाज को खुजाने में सुख तो है, पर यह सांसारिक सुख है । खाज होना ही नहीं, आत्मिक सुख है । सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति
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