Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर

मौत

ज़िंदगी की चादर पर रोज़ एक छेद हो जाता है… ताकि जीने वाला झाँक कर देख सके कि अब मौत उसके कितने क़रीब है…. पूज्य

Read More »

प्रकृति

नई शिक्षा का प्रचार प्रसार जोर-शोर से हुआ; चिड़िया ने पानी में तैरने की कोशिश की, मछली ने पेड़ों पर चढ़ने की, मयूर के रंग-बिरंगे

Read More »

ब्रम्हचर्य धर्म

आत्मा में रमना ही सच्चा ब्रम्हचर्य है । प्रवचन पर्व (आ.श्री विद्या सा.जी) 2) बेटे और पति के शरीरों पर हाथ रखने से जब एकसा

Read More »

संयम धर्म

मन,वचन,काय का सदुपयोग ही संयम है । गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी 2) एक बड़ा ही शरारती बच्चा था। उसे दिन-भर खेलना , टी वी देखना

Read More »

सत्य धर्म

कहते हैं “सत्य कड़वा होता है”, पर वास्तविकता यह है कि सत्य कड़वा हो ही नहीं सकता । यदि कड़वा होता तो भगवान तो सदैव

Read More »

आर्जव धर्म

मायाचारी का अभाव । 2) ईमानदारी, उन्मुत्त हृदय, स्पष्टवादिता, सादगी, भोलापन, सरलता ही आर्जव धर्म है । ईमानदारी की नाव पर तो हम सब सवारी

Read More »

क्षमा धर्म

1) क्रोध आने के कारण… * मनोवृत्ति * आसक्ति * अपेक्षा गुरवर श्री क्षमासागर जी 2) क्रोध पर क्रोध करने से क्रोध कम नहीं होगा, क्षमा

Read More »

Denial of Reality

Since childhood we are made used to Denial of reality. For us to raise our life to a new height, we need to over-come this

Read More »

रूठना

मैं रूठा, तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है, कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? बात छोटी को लगा लोगे

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

March 26, 2017

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031