Category: वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर

समता

जिसकी नहीं बनी घर में, वो क्या करेगा वन में ! (अरुणा)

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मोह

फलदार पेड़ों से फल गिरते रहते हैं, पर नये नये फल लगते रहते हैं । क्यों ? क्योंकि मोह की जड़ें बड़ी गहरी हैं, वे

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संसार के सुख दु:ख

दो बच्चे देरी से स्कूल पहुँचे । कारण ! पहले का सिक्का गिर गया था । दूसरा सिक्के पर पैर रक्खे खड़ा रहा था ।

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अपना

जिसे पाकर लगे कि अपने को पा लिया, समझना कि वह अपना है; जिसे पाकर लगे कि अपने को खो दिया, तो मानना कि वह

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संवेदना

जहाँ तरलता थी, मैं डूबता चला गया ; जहाँ सरलता थी, मैं झुकता चला गया ; संवेदनाओं ने मुझे जहाँ से छुआ, मैं वहीं से

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असाधारणता

असाधारण कहलाने की चेष्टा न करें, बल्कि साधारण रहकर असाधारणता को हासिल करें ।

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सत्य

सत्य की भूख तो सबको होती ही है. पर.. जब सत्य परोसा जाता है तो बहुत कम लोगो को उसका स्वाद पसंद आता है। यदि

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मंगल आशीष

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