काँच का बर्तन गिरे तो चकनाचूर, स्टील का गिरे तो सिर्फ दब जाता है/टूटता नहीं है ।
कारण !
नियति प्रदत्त स्वभाव ।

चिंतन

परीक्षा संसार की करो,
प्रतीक्षा परमात्मा की
और
समीक्षा अपनी करो ।

पर हम…
परीक्षा परमात्मा की करते हैं,
प्रतीक्षा सुख की
और
समीक्षा दूसरों की करते हैं !

???????? इंडिया नहीं भारत बोलों ????????

(सुरेश)

इस और अगले जन्म को सार्थक बनाना ही जीने का उद्देश्य होना चाहिये ।

आ. श्री महाप्रज्ञ जी

इस जीवन को विषय-भोगों से वंचित रख कर अगले जीवन को बनाना बुद्धमतता है ।

श्री रायचंद्र जी

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