सुख-दु:ख तथा आदत में क्या संबंध है ?
गरीब को महल में नींद नहीं दुखी, अमीर झोंपड़ी में नींद नहीं तो दुखी।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

भविष्य वर्तमान का ही तो Extension है।
वर्तमान अच्छा तो, भविष्य अच्छा होगा ही। *

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

* (भूतकाल के दोषों को भी भुला दिया/ क्षमा कर दिया जायेगा)।

विशालता जिसकी कोई सीमा ना हो जैसे आकाश/ विचार/ भगवान का सुख, ज्ञान।
एक रूप/ न वृद्धि/ न ह्रास।
संसारी सुख कम-ज्यादा इसलिए विशाल नहीं।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

साधु का “जियो” कमज़ोर*, गृहस्थ का “जीने दो”।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

* अपने शरीर पर ध्यान कम, आत्मा/ धर्म/ समाज पर अधिक।

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