ज़िन्दगी का आनंद अपने तरीके से ही लेना चाहिए,
लोगों की खुशी के चक्कर में तो शेर को भी सर्कस में नाचना पड़ता है।

(श्रीमति शर्मा)

चरित्र वृक्ष के समान है,
लेकिन प्रतिष्ठा उसकी छाया* है..

???? मंजू ????

* पापोदय से यदि बादल छा जांय तो छाया नहीं पड़ेगी,
लेकिन चरित्र रूपी वृक्ष यदि खड़ा रहा/अड़ा रहा तो प्रतिष्ठा रूपी छाया आज नहीं तो कल उसके आसपास छा ही जायेगी,जब पापोदय के बादल छटेंगे ।

जिनको तप से डर लगता है वे कम से कम भक्ति करके अपने कल्याण की शुरुआत करें ।
फिर तप की क्या ज़रूरत ?
काढ़े से बुखार 7 दिन में उतरता है, उपवास से 3 दिन में ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

जैसे मिठाई के नाम से ही मुँह में गीलापन आ जाता है/ तृप्ति सी लगने लगती है,
ऐसे ही भक्ति से भगवान आ नहीं जाते, पर गीलापन(आंखो में)/तृप्ति(हृदय में) आ जाती है ।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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