एक बार गांधी जी General Class में यात्रा कर रहे थे ।
एक गाँव वाला आया और गांधी जी को धक्का मार कर बैठ गया और गाँधी-बाबा का भजन गाने लगा ।
हम भी आत्मा आत्मा का नाम रटते रहते हैं पर अज्ञानतावश आत्मा को पहचानते नहीं ।
भक्ति अंजुरी
आदिनाथ भगवान का जन्मदिन श्रावकों के लिए विशेष महत्व का है । क्योंकि उन्होंने ही सर्वप्रथम जीवन चलाने की पद्धति (खेती, व्यापार, कला, रक्षा आदि) सिखाई थी ।
बलवान निमित्त का कर्तव्य है कि वह कमज़ोर निमित्त को झूठ बोलने के लिये मज़बूर ना करे ।
जैसे उधारी वापस ना कर पाने वाले के सामने न पड़े ।
ब्र.नीलेश भय्या
सुख,
व्यक्ति के अहंकार की परीक्षा लेता है,
जब कि…
दुःख,
व्यक्ति के धैर्य की ।
दोनों परीक्षाओं में उत्तीर्ण व्यक्ति का जीवन ही सफल जीवन है !
???? जय जिनेन्द्र देव की ????
???????? सुरेश ????????????
Don’t interrupt me while I am interrupting.
जिओ और जीने दो की सर्वोच्च साधना संलेखना में ही भायी जाती तथा की जाती है ।
(जीवों की रक्षा ना कर पाने पर देह त्याग करके )
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
यदि व्यक्ति विवेकी है तो उसे सत्संग की क्या आवश्यकता ?
इस प्रश्न के ज़बाब में गुरु ने जानवरों को बाँधने वाले खूँटे को हिलाने को बोला ।
वह मज़बूत था, हिल नहीं रहा था, पर जानवरों का मालिक आया और उस पर हथौड़ा मारा, तब जानवरों को उससे बाँधा ।
रोजाना मालिक ऐसा ही करता था ।
कारण ?
आज तो खूँटा मज़बूत है पर जानवर उसे ढ़ीला न कर दें ।
(डॉ. अमित राजा)
Every Relationship is like a Glass.
A Scratch on any side will reflect on other side.
So always handle everyone’s feelings with Care & Respect.
???? Suresh ????
समर्पण = सम(सत्य)+अर्पण ।
अर्पण का दर्पण से गहरा संबंध है,
दर्पण यानि देखकर कर चलना ।
बीज समर्पण करता है तो वटवृक्ष, बूँद < सागर,
जीव < परमात्मा बन जाता है ।
आज गृहस्थ तथा साधु दोनों ही भाग्य भरोसे जी रहे हैं ।
फ़र्क सिर्फ इतना है कि गृहस्थ रो रो कर जीते हैं, साधु हँस हँस कर ।
प्रवृत्ति – अहिंसा का पालन,
निवृत्ति – हिंसा छोड़ना,
व्रत – प्रवृत्ति/निवृत्ति में सहायक ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
डॉक्टरी में एक और महत्वपूर्ण शिक्षा दी जाती है – Case बिगड़ने पर Expert Specialist को कब/समय रहते बुलाना होगा ।
हमको भी यह मालूम होना चाहिये कि कब तक पुरुषार्थ के सहारे रहें और कब गुरु/भगवान की शरण में पहुँचना चाहिये ।
(डॉ. एस. एम. जैन)
Don’t watch the clock;
do what it does.
Keep going…
झरनों से इतना मधुर संगीत कभी न सुनाई देता,
अगर राहों में उनके पत्थर न होते ।
???????? सुरेश ????????
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments