एक रेत का कण, खीर का आनंद समाप्त,
एक छोटी सी दुर्गंध पूरे वातावरण को दूषित,
नीम का बीज भी कड़ुवा होता है ।
कषाय तो कर्मबंध का ही कारण होता है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

पाप क्रियाओं के लिये धर्म करने से सफलता तो मिलेगी पर उसका अंत-फल सही नहीं आयेगा, जैसे रावण का अंत-फल ।

मुनि श्री सुधासागर जी

समस्यायें ऊँटों के समूहों जैसी होती हैं – कुछ अपने आप बैठ जाते हैं, कुछ बिठाने से,
कुछ बैठते ही नहीं तथा कुछ बैठ कर फिर खड़े हो जाते हैं ।
ज्यादा सिरफोड़ी नहीं करना Normal पुरुषार्थ करो, बाकी को स्वीकार कर लो ।

पैर का काँटा, धर्म करने से नहीं पुरुषार्थ से निकलेगा ।
पर धर्मध्यान से काँटे की वेदना जरूर कम हो जायेगी ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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