प्रेरणा थोड़े समय के लिये ही कार्य करती है,
अंतर-जागृति, निरंतरता प्रदान करती है ।

क्षु.श्री ध्यानसागर जी

जो पूर्णमासी नहीं मनाते, उनके जीवन में अमावस्या नहीं आती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

किसी ने पूछा – भगवान दु:ख दूर करते हैं ?
साधु ने कहा -ना रे ! भगवान किसी का दुःख दूर नहीं करते ! यदि दु:ख दूर ही करना होता, तो देते ही क्यों ?

फिर दुःख दूर कौन करता है ?
साधु – भगवान का “नाम” दु:ख दूर करता है । उनके “स्मरण” में मन का “रमण” होने लगे तो दुःख का “मरण” निश्चित है!

???????? सुरेश ????????

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