पुण्योदय में संकट नहीं आते, पापोदय में यदि धर्म करें तो संकट टलेगा तो नहीं क्योंकि धर्म अन्याय नहीं होने देगा ।
पर भविष्य में पाप कर्म दुहराने की प्रवृत्ति समाप्त कर देता है ।
क्षु. श्री ध्यानसागर जी
पता नहीं कैसे परखता है,
मेरा ईश्वर मुझे..?
इम्तिहां भी मुश्किल ही लेता है,
और फेल भी होने नहीं देता..!
(मंजू)
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हम सही हो सकते हैं, लेकिन मात्र हमारे सही होने से सामने वाला ग़लत नहीं हो सकता…!
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(सुरेश)
‘8’ का आधा कितना ?
‘4’
और ?
अनेकांत लगाओ तो ‘3’ (यदि Vertical आधा करो) ।
‘0″ (यदि Horizontal आधा करो तो) ।
आलाप –
- कथन पद्धति
- कम ना ज्यादा
- कथन की स्पष्टता
वार्तालाप –
- वार्तालाप में कोई सिद्धांत नहीं
- आपस में आम बातचीत
आ. श्री विद्यासागर जी
“आ” से आनंद,
“श” से शिव/मुक्ति ।
“व” से विशुद्ध,
“द” से दया ।।
आशीर्वाद से नकारात्मता कम होती है, सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
मुठ्ठियों में क़ैद हैं जो खुशियाँ
वो बांट दो यारो,
ये हथेलियां तो इक दिन वैसे भी खुल ही जानी हैं
(सुरेश)
” मनचाहा ” बोलने के लिए ,
” अनचाहा ” सुनने की ताकत होनी चाहिए ।
(शुचि)
स्वयं को बदलना…कितना कठिन है…
फिर
दूसरे को बदलना…कैसे सरल हो सकता है !
(मंजू)
कुछ चीज़ें ‘कमजोर’ की हिफाज़त में भी ‘महफूज़’ रहती हैं,
जैसे ‘मिट्टी की गुल्लक में लोहे के सिक्के…’
बशर्ते विश्वास हो ।
(सुरेश)
फूंक मार कर दिये को बुझा सकते हैं.!
किन्तु…
अगरबत्ती को नहीं…
क्योंकि
जो ख़ुद को जलाकर दूसरों को सुगंध का अनुभव कराता हो, उसे कोई बुझा नहीं सकता…!!
(मंजू)
सन्मान हमेशा समय का होता है,
लेकिन
आदमी उसे अपना समझ लेता है ।
(मंजू)
गुज़रते दिनों का नहीं..
बल्कि
यादगार लम्हों का नाम है…
ज़िंदगी…
(सुरेश)
इसलिये ऐसे काम करें जिन्हें याद करके गर्व हो/ सुखद अनुभूति हो ।
एक राज्य में राजा अल्पायु ही होते थे ।
राजा के पूछने पर गुरु ने कहा कि जब वो हरा पेड़ सूख जायेगा तब बताऊंगा ।
15 दिन में वह पेड़ सूख गया ।
कारण !
राजा ने भावना भायी थी कि जल्दी सूखे ।
गुरु – राजन! तुम्हारे भावना भाने से हरा-भरा पेड़ सूख गया। ऐसे ही प्रजा तुम्हारे बारे में बुरी भावना रखती है, इसलिये राजा अल्पायु होते हैं ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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