अ= नहीं, हम

जिसमें अपने को भूल जाय, उसे अह्म कहते हैं याने वह्म में रहना ।

बुराईयों में आकर्षण होता है,
बुरे लोगों के अचेतन मन में भय रहता है, इसलिये वे संगठित रहते हैं ।

अच्छों में प्राय: घमंड़ आ जाता है और जिनमें नहीं आता वे स्वाबलंबी होते हैं तथा मोक्षमार्ग पर अकेला ही चला जाता है ।

लॉकर की दो चाबियाँ हैं, अमूल्य निधी दोनों के लगने पर ही मिलेगी ।
पुरुषार्थ की चाबी हमारे पास है, भाग्य की मैनेजर के पास ।
अपनी चाबी लगाते रहना, पता नहीं कब मैनेजर अपनी चाबी लगा दे ।

(धर्मेंद्र)

जल और मोह जहाँ गहरा होता है, बहाव उधर ही हो जाता है/वहीं ठहर जाता है, ठहरने से सड़ने लगता है ।
खुद का तथा जिससे मोह की तीव्रता होती है, दोनों का नुकसान करता है ।

चिंतन

महाराणा प्रताप ने जंगल में घास की चार रोटियाँ बनायीं, तीन कोई जानवर उठा ले गया ।
चौथी रोटी दान की थी, बच्चा तक भूखा रो रहा था पर दान की वह रोटी बच्चे को नहीं दी गयी ।
उसी समय भामाशाह ने अपार धनराशी लाकर राणा प्रताप को सौंप दी ।
इसे दान का प्रताप ना कहें तो क्या कहें !!

मुनि श्री सुधासागर जी

संसार में असंतुष्ट प्राणी वैराग्य लेने के बाद भी उन चीजों को पाने में लग जायेगा, जिनकी कमी वह संसार में अनुभव करता था ।
पर अनासक्त भाव दोनों क्षेत्रों में लाभकारी होता है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

आज गुरुदेव का समाधि-दिवस है ।

5 छिद्रों वाले घड़े को कैसे भरेंगे ?

गुरु ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !

इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा !

तन की जाने, मन की जाने,
जाने चित की चोरी ।

(धर्मेन्द)

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930