पल पल *रंग* बदलती दुनिया…
और लोग पूछते हैं….

*होली* कब है…????

(एस.एम.जैन)

नवनीत मथने पर ऊपर आ जाता है, पर पूरा नहीं;
घी तपने पर पूरा उठ जाता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सफलता किसी पर आश्रित नहीं होती – पैसा, प्रसिद्धि आदि पर नहीं।
गुणों को निखारना/उन्हें बनाये रखना सफलता है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

सीताजी ने अपने सतीत्व का हवाला देकर अग्नि परीक्षा में अग्नि को शांत कर दिया, पर जब रावण उनके सतित्व को खंड़न करने के लिये ले जा रहा था तब सतीत्व का सहारा क्यों नहीं लिया ?
जब भी कोई मर्यादा खंड़ित कर देता है तब दोष लग जाता है, चाहे वह उल्लंघन परोपकार के लिये ही क्यों ना हो ।

भीष्म और जटायु ने अपने-अपने जीवनकाल में एक एक पाप/पुण्य किये थे –
भीष्म ने समय पर क्रोध ना करने का पाप,
जटायु ने क्रोध करने का पुण्य ।

एक का मरण बाणों पर, दूसरे का श्री राम की गोद में ।

जीवन से प्रेम तो साधू ही करते हैं क्योंकि वे उसकी क़ीमत जानते हैं/सुख में रहते हैं ।
भिखारी/दुखी के मरने पर सब संतोष करते हैं – अच्छा हुआ छूट गया ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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