5 छिद्रों वाले घड़े को कैसे भरेंगे ?

गुरु ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !

इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा !

तन की जाने, मन की जाने,
जाने चित की चोरी ।

(धर्मेन्द)

मीठा मीठा सुनोगे तो सुगर बढ़ जायेगी,
करेला/मिर्ची खाओगे तो घट जायेगी (विष से ही विष कटता है) ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

पाप परिस्थिति नहीं कराती, मन:स्थिति कराती है ।
जिस परिस्थिति में रागी पाप करता है, उसी परिस्थिति में वैरागी पुण्य करता है ।

क्षु. श्री ध्यानसागर जी

एक तरफ भगवान के दर्शन हों, दूसरी ओर चींटी की रक्षा तो पहले चींटी की ओर देखो ।
चींटी की ओर देखोगे तो भगवान बनोगे,
भगवान की ओर देखोगे तो (यदि चींटी मर गयी तो !) चींटी बनोगे ।

मुनि श्री सुधासागर जी

नवनीत मथने पर ऊपर आ जाता है, पर पूरा नहीं;
घी तपने पर पूरा उठ जाता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सफलता किसी पर आश्रित नहीं होती – पैसा, प्रसिद्धि आदि पर नहीं।
गुणों को निखारना/उन्हें बनाये रखना सफलता है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30