ये भय/अभाव के निवारण के लिये नहीं,
बल्कि निर्भय होने तथा प्राप्ति की अभिलाषा ही समाप्त करने के लिये होती हैं ।

सूप बेकार को छोड़ता है – साधु ।
छलनी बेकार को ग्रहण करती है – गृहस्थ ।।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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