राग दोषों को अनदेखा कर देता है,
प्रेम दोषों का शोधन करता है ।
जिसको भी अपना बनाता हूँ, वह छोड़कर चला जाता है ।
दु:ख को अपना बना लो !
(आर.के.गुप्ता)
“पुण्य”
छप्पर फाड़ कर देता है…
“पाप”
थप्पड़ मार कर लेता है !
(मंजु)
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(Parul-Delhi)
इनसान नीचे बैठा दौलत गिनता है…
कल इतनी थी..आज इतनी बढ़ गयी..
ऊपर वाला हँसता है और इनसान की साँसें गिनता है…
कल इतनी थीं..आज इतनी कम हो गयीं..।
(श्रीमती शर्मा)
बच्चों पर अनुशासन Tree Guard जैसा होना चाहिए, न ज़्यादा जकड़ा हुआ, न बहुत ढ़ीला ।
ज़िंदगी….
जो शेष है…
वो विशेष है….!
(ललित)
दुकानदार माल से मालदार नहीं,
भावों से मालदार बनता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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(Dr.Amit)
प्रतिभा का विकास, अनुकूल परिस्थिति में,
चारित्र का विषम, परिस्थितियों में ।
क्रिया शरीर से,
भाव मन से,
अभिप्राय उपयोग से ।
प्रवृत्ति में बदलाव – क्रियात्मक प्रगति,
वृत्ति में बदलाव – गुणात्मक प्रगति ।
अधर्म से बचना ही धर्म है ।
Grand father saw it in river,
Father saw it in well,
We saw in tap,
Our children see in bottle,
Where will our grand children see it !
Please SAVE water.
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