वास्तु का प्रभाव पुण्य के उदय में नगण्य हो जाता है ।
वास्तु-शुद्धी से, वास्तविक-शुद्धी(कर्मों की) बेहतर/ज़्यादा असरकारक होती है ।

क्या शरीर को कष्ट देकर धर्म करना सही है ?
नहीं, धर्म से तो शारीरिक कष्ट सहने की शक्ति आती है ।
उस शक्ति को बढ़ाने के लिए, क्षमतानुसार शरीर को कष्ट देते हुए,समता-भाव पूर्वक धर्म-ध्यान करना चाहिए ।

जो अपने कार्य/कर्तव्य में डूब जाता है, वह उस कार्य/कर्तव्य से कभी ऊबता नहीं है ।
धर्म के क्षेत्र में तो नित नए आनंद का अनुभव होता रहता है सो ऊबने का तो प्रश्न ही नहीं, उल्टे उत्साह बढ़ता ही रहता है ।

एक समुदाय में ब्याज लेना गुनाह है, तो बाकीयों को लेना चाहिए ?
शोषण (सामान्य से ज़्यादा नहीं) नहीं, पोषण (जिसमें दोनों पक्षों का भला हो) हो तो ले सकते हैं ।

मोह में स्वाभिमान रह नहीं सकता ।

अभिमान को ही स्वाभिमान मान लेते हैं ।
सम्मान की इच्छा रखना अभिमान है,
ऐसे कार्यों से बचना, जिससे अपमानित ना होना पड़े, यह स्वाभिमान है ।

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April 8, 2022

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