समय फिसलता नहीं, रेत की तरह मुट्ठी से
फिसलते तो हम हैं, समय की मुट्ठी से,

सिर्फ़ नम बने रहकर ही टिक सकते हैं
हम इस समय की मुट्ठी में ।

(अभिषेक-शिवपुरी)

अपना संपूर्ण जीवन देकर
‘पानी’ वृक्ष को
बड़ा करता है…,

इसलिए शायद “पानी” लकड़ी को
कभी डूबने नहीं देती..

माता पिता की भी यही भूमिका है हमारे जीवन में !

(धर्मेंद्र)

हमारी प्रगति क्यों नहीं हो रही ?
हममें अवगुण ही नहीं, गुण भी एक से एक अच्छे हैं/पूर्व में रहे भी हैं;
पर हम उनकी सुरक्षा नहीं कर पाए/उन्हें बढ़ा नहीं पाए ।
इसी लिए जहाँ थे, वहाँ से नीचे चले जा रहें हैं;
क्योंकि किसी भी स्थिति में रुके नहीं रह सकते ।

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