शरीर स्वयं(अपनी आत्मा) का सोचा नहीं करता है,
क्योंकि आत्मा, शरीर के लिए परद्रव्य है ।
(मंजु)

(Suresh)
Success with a Negative Attitude is called……..
“Luck”.
But
Success with Positive Attitude is called……..
“Achievement”.
Always be an ACHIEVER.
(Ravi Kant)
आनंद शब्द “नंद” धातु से बना है, नंद का अर्थ है संतोष ।
जब संतोष आ जाए तो आनंद होगा ही ।
इसका उल्टा कुछ होता ही नहीं, जैसे सुख का उल्टा दु:ख होता है ।
महापुरुषों की नज़र में
भगवान महावीर……
1) भगवान महावीर अहिंसा के अवतार थे,
उनकी पवित्रता ने संसार को जीत लिया था,
अहिंसा तत्त्व को यदि किसी ने अधिक विकसित किया तो वे महावीर स्वामी ही थे ।
महात्मा गांधी
2) मैं अपने को धन्य मानता हूँ कि मुझे महावीर स्वामी के प्रदेश में रहने का सौभाग्य मिला ।
अहिंसा जैनों की विशेष सम्पति है ।
जगत में किसी भी धर्म में अहिंसा सिद्धांत का प्रतिपादन इतनी सफलता से नहीं किया गया है ।
डॉ राजेन्द्र प्रसाद
3) यदि मानवता को विनाश से बचाना है और कल्याण मार्ग पर चलना है तो भगवान महावीर के बताए हुए मार्ग को ग्रहण किए बिना कोई रास्ता नहीं है ।
4) महावीर स्वामी ने भारत में ऐसा संदेश फैलाया कि धर्म केवल सामाजिक रूढ़ियों के पालन करने में ही नहीं किंतु, सत्य धर्म का आश्रय लेने में मिलता है ।
विश्व कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर
(सुरेश)
जो भगवान के मंदिर का पता बताये,
उसे पताका कहते हैं ।
जो जीवन की व्यथा को कम करे, वही कथा सार्थक है ।
(बाक़ी सब तो विकथाएं हैं, समय/शक्ति की बरबादी है )
एक दोस्त अपने दोस्त के शव को देख कर मुस्कराया !
तो एक बुज़ुर्ग ने कहा “बेटा ! जवान मौत पर मुस्कराते नहीं” !
लड़के ने आँखें साफ़ कीं और बोला… “बाबा क्या बताऊँ, दिल तो खून के आँसु रो रहा है ! लेकिन दोस्त से वादा किया था जब भी मिलेंगे…हँसते हुए मिलेंगे…!”
उसने कहा था… ” मैं जब मर जाऊँ, तो हँसते हुए आना यारो ! क्योंकि उस वक्त मेरे हाथ तुम्हारे आँसु नहीं पोंछ सकेंगे ” !
(डा.अमित)

(Parul-Delhi)
वह तो एक, दो बूंद ले रहा है, आप उसकी जान क्यों लेना चाहते हो ?
वह अज्ञानी है, तुम ज्ञानी/दयावान ।
लता तो प्रारब्धानुसार बनती है;
पर
वह सबल पेड़ को निमित्त लेकर उर्ध्वगमन,
तथा
कुएँ का सहारा लेकर अधोगमन करती है ।
आज परछाई से पूछ ही लिया
क्यों चलती हो मेरे साथ ?
उसने भी हँसके कहा…
“और दूसरा है ही कौन तेरे साथ” ।
क्षमा हमारा स्वभाव है ।
क्षमा शब्द “क्षम” धातु से बना है,
जिसका अर्थ है “सामर्थ्य” ।
जो जितना सामर्थ्यवान होगा, उसे उतना ही क्षमावान होना चाहिए ।
क्रोध शाँत करने के उपाय…
1) सकारात्मक सोचें
2) क्रोध में ईंधन न डालें
3) चुप रहें ।
गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी
हम पर 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया,
उस समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार
1 अप्रैल से अपना नया साल मनाते थे,
आज भी हमारे बहीखाते और बैंक 31 मार्च को बंद होते हैं और 1 अप्रैल से शुरू होते हैं ।
जब भारत गुलाम था तो विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते हुए,
1 अप्रैल को मूर्खता दिवस “अप्रैल फूल” का नाम दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे ।
याद रखो अप्रैल माह से जुड़े हुए ऐतिहासिक दिन और
त्यौहार…
1. हिन्दुओं का पावन महीना, इस दिन से शुरू होता है ।
(शुक्ल प्रतिपदा)
2. भारत के रीति-रिवाज, सब इस दिन के कलेण्डर
के अनुसार बनाये जाते हैं ।
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