गहराई गम्भीरता की,
निचाई नीचता की प्रतीक है ।
चिंतन
अच्छा काम करना पुरुषार्थ,
अच्छा/बुरा उसका फल ।

(Dr.Nikita)
मृत्यु निश्चित है, मृत्यु का समय अनिश्चित ।
मृत्यु से भय है, मृत्यु का भय नहीं, यदि होता तो पाप कर ही नहीं सकते थे ।
दूसरों पर संकट आये, ताप से पिघलते हैं,
अपने पर आये, तप से पकते हैं ।
“ज” से जन्म मरण, “प” से पाप;
जिससे इनका नाश हो, वह है जाप ।
माँ से प्रेम या माँ से जो इच्छाओं की पूर्ति होती है, उनसे प्रेम ?
भगवान से प्रेम या भगवान के लिये बनवाये मंदिर से ?
छतरी से प्रेम या बरसात से बचाने वाली छतरी से ?
पुण्य का Short term फल – संतुष्टि,
Long term में – वैभवादि, सुखानुभूति ।
पाप का Short term फल – संताप,
Long term में – दु:ख ।
चिंता संसारी,
चिंतन उपकारी,
चिंता समाप्त होने पर चिंतन,
या कहें – चिंतन से चिंता समाप्त होती है ।

(Manju)
चित्त = मन,
चेतना = जो मन को चलाती है ।
पात्र को देखकर करने का भाव उमड़ पड़े, ऐसे दान को करुणा-दान कहते हैं ।
संयम से जीवन सुधरता है,
तप से आत्मा निखरती है ।
हम प्रायः पुराने पापोदय या पुरुषार्थ की कमी को काल-दोष कह कर ढंकते रहते हैं ।
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