धन कमाना, ख़ूब कमाना भी चलेगा,
झटपट कमाना नहीं चलेगा ।
जिन संबंधों में लेन-देन हों, वे संबंध नहीं अनुबंध रह जाते हैं ।
तो भगवान से संबंध है या अनुबंध ?
चिंतन
ग्रहस्थ होना एक स्थिति है,
सदग्रहस्थ होना गुण है,
जिससे जीवन की सार्थकता है ।
धर्म से मन में दया बढ़ती है, ज्ञान से वैराग्य ।
दया आने से धर्म और बढ़ता है,
वैराग्य से ज्ञान में वृद्धि होती है ।
स्वयं कानों से सुना, आँखों से देखा भी अपने मुँह से मत कहना,
क्योंकि (पूर्ण) सत्य ना तो कहा जा सकता है,
ना ही देखा जा सकता है ।
सबसे बड़ा प्रश्न चिंह है- “संसार” ,
(इसका) सबसे छोटा उत्तर है – “मोक्ष” ।
नदी उसी को कहेंगे जिसमें जल* हो,
तथा
प्रवाह** हो ।
* आद्रता/संवेदनशीलता
** निरंतरता
जिस समस्या का समाधान न निकले, उसे निदान मान कर स्वीकार लो,
यही समाधान होगा ।

(Manju)
शान्ति कैसे मिले ?
घटित घटनाओं की स्वीकृति से ही शान्ति आती है ।
श्रेष्ठता जन्म से नहीं आती ,
गुणों के कारण निर्माण होती है ।
दूध- -दही- -छाछ- -घी
सब एक ही कुल के होते हुए भी,
सब के मूल्य अलग अलग होते हैं ।
(आर.के.गुप्ता)
अच्छे लोगों की भगवान…
अच्छी (बड़ी) परीक्षा लेता है,
परन्तु साथ नहीं छोड़ता,
और
बुरे लोगों को भगवान…
बहुत कुछ देता है,
परंतु साथ नहीं देता |
(धर्मेंद्र)
सभी रसों के शांत होने पर ही “शांत-रस” आता है ।
इसलिए “शांत-रस” रसों का राजा है ।
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