“ज” से जन्म मरण, “प” से पाप;
जिससे इनका नाश हो, वह है जाप ।
माँ से प्रेम या माँ से जो इच्छाओं की पूर्ति होती है, उनसे प्रेम ?
भगवान से प्रेम या भगवान के लिये बनवाये मंदिर से ?
छतरी से प्रेम या बरसात से बचाने वाली छतरी से ?
पुण्य का Short term फल – संतुष्टि,
Long term में – वैभवादि, सुखानुभूति ।
पाप का Short term फल – संताप,
Long term में – दु:ख ।
चिंता संसारी,
चिंतन उपकारी,
चिंता समाप्त होने पर चिंतन,
या कहें – चिंतन से चिंता समाप्त होती है ।

(Manju)
चित्त = मन,
चेतना = जो मन को चलाती है ।
पात्र को देखकर करने का भाव उमड़ पड़े, ऐसे दान को करुणा-दान कहते हैं ।
संयम से जीवन सुधरता है,
तप से आत्मा निखरती है ।
हम प्रायः पुराने पापोदय या पुरुषार्थ की कमी को काल-दोष कह कर ढंकते रहते हैं ।
धन कमाना, ख़ूब कमाना भी चलेगा,
झटपट कमाना नहीं चलेगा ।
जिन संबंधों में लेन-देन हों, वे संबंध नहीं अनुबंध रह जाते हैं ।
तो भगवान से संबंध है या अनुबंध ?
चिंतन
ग्रहस्थ होना एक स्थिति है,
सदग्रहस्थ होना गुण है,
जिससे जीवन की सार्थकता है ।
धर्म से मन में दया बढ़ती है, ज्ञान से वैराग्य ।
दया आने से धर्म और बढ़ता है,
वैराग्य से ज्ञान में वृद्धि होती है ।
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