नई शिक्षा का प्रचार प्रसार
जोर-शोर से हुआ;

चिड़िया ने पानी में तैरने की
कोशिश की,

मछली ने पेड़ों पर
चढ़ने की,

मयूर के रंग-बिरंगे पंख देखकर…
कोयल ने वैसा बनने की कोशिश की…

सब की परीक्षा हुई;

चिड़िया डूबते-डूबते बची…

मछली तड़प तड़प कर
मरणासन्न हो गई…

कोयल बदरंग दिखने लगी…

सब अपनी अपनी निधि
खो बैठे…

अपनी प्रकृति खोकर
कोई कहीं का नहीं रहता… ।

व्यथा में सुख की नहीं, शान्ति की तलाश रहती है ।
सुख की खोज तो अंतहीन है (जैसे ही व्यथा समाप्त हुई, फिर से सुख की खोज में लग जाते हैं) ।

क्षु. श्री ध्यानसागर जी

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April 8, 2022

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