ज़िंदगी में कभी-कभी लोग
“बेहतर” की तलाश में
“बेहतरीन” को खो देते हैं ।
किसी की अंतिम यात्रा में जाओ तो यह मत समझना कि आप उसे उसकी मंज़िल पर ले जा रहे हैं…
बल्कि ,
यह समझना कि अर्थी पर लेटा इंसान…
मुर्दा होकर भी तुम्हें तुम्हारी मंज़िल दिखाने ले जा रहा है ।
(मंजू)
No matter how many times the teeth bites the tongue, they still stay together in one mouth. That is the spirit of FORGIVENESS.
Even though the two eyes don’t see each other, they see things together, blink simultaneously and cry together. That is UNITY.
(Pranjal)
दुख में
स्वयं की
एक उँगली ही
आँसू पोंछती है,
और
सुख में
दसों उँगलियाँ
ताली बजाती हैं ।
जब
अपना
शरीर ही
ऐसा करता है,
तो
दुनिया का
गिला शिकवा
क्या करना !!
(अभिषेक-देहली)
पुरानी मिठाई घर ही रखे रहने से सड़ेगी, बदबू फैलाएगी ।
बाँटने में अपना भला ज़्यादा है ।
ऐसे ही अन्य परिग्रहों के बारे में भी विचार करना चाहिए ।
चिंतन
सब कुछ देने के बदले में हीरा लेना चाहोगे या भूसा ?
जबाब नहीं देना,
सिर्फ़ सोचना – क्या लेने की तैयारी कर रहे हैं !!
एक शैतान ने एक बुज़ुर्ग से कहा तुम्हें ईश्वर पर बहुत विश्वास है ?
तो एक काम करो,
एक ऊँचे पहाड़ से छलांग लगा कर बताओ,
यदि तुम्हारा ईश्वर तुम्हारी रक्षा कर ले तभी मानूँगा कि ईश्वर है ।
बुज़ुर्ग व्यक्ति ने मुस्कुराकर जवाब दिया…..
यह ईश्वर का काम है कि वह मुझे आज़माए,
मेरा काम नहीं कि मैं ईश्वर को आज़माऊँ ।
दूसरा,
मैं भगवान की बात मानता हूँ,
शैतान की नहीं ।
Always look for What’s Wrong,
before looking for,
Who’s Wrong.
(Dr.Amit)
बच्चे खेल-कूद में अपनी ऊर्जा को लगाते हैं,
गृहस्थ संतान उत्पत्ति में,
साधक, ध्यान की एकाग्रता में ।
क्षु. श्री ध्यानसागर जी
संसार में दो प्रकार के वृक्ष हैं….
प्रथम ???? अपना फल अपने आप दे देते हैं – उदाहरण :- आम, अमरुद, केला इत्यादि …
द्वितीय ???? अपना फल छिपाकर रखते हैं -उदाहरण :- आलू, अदरक, प्याज़, इत्यादि ..
जो अपना फल अपने आप दे देते हैं उन वृक्षों को सभी सुरक्षित रखते हैं किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं।
ठीक इसी प्रकार जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में दे देते हैं, सभी उनका ध्यान रखते हैं । वहीं दूसरी ओर जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, वे समय रहते ही भुला दिये जाते हैं ।
(रजनी)
घोंसला बनाने में कुछ
यूँ मशग़ूल हो गए…..
उड़ने को पंख थे
हम ये भी भूल गए……….!
(धर्मेंद्र)
बड़े लोगों से मिलने में
सदा फ़ासला रखना
क्योंकि
नदी समंदर से मिलने के बाद
नदी नहीं रहती….!!
(सुरेश)
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