हम सब को बहुत सी रहमतें बख्शी जिसमें से तीन ये हैं :
1. अनाज में कीड़े पैदा कर दिए ,
वरना लोग इसे सोने और चाँदी की तरह जमा करते
2. मरने के बाद जिस्म में बदबू पैदा की ,
वरना कोई अपने प्यारों को जलाता या दफ़न नहीं करता
3. मुसीबत के बाद सब्र और सुकून दिया व भूलने की आदत,
वरना ज़िंदगी कभी ख़ुशगवार ना होती।
(नमिता-सूरत)
परिग्रह से निश्चिंतता मानना,
ऐसे ही है,
जैसे,
ज़हर से अमरता को मानना ।
(धर्मेंद्र)
कोई भी व्यक्ति आपके
पास तीन कारणों से आता है !
भाव से,अभाव से या प्रभाव से ।
यदि भाव से आया है तो उसे प्रेम दो,
अभाव से आया है तो मदद दो,
और यदि प्रभाव से आया है,
तो प्रसन्न हो जाओ कि परमात्मा ने आपको इतनी क्षमता दी है ।
(श्रीमति शर्मा)
निराशा असफ़लता की पहली निशानी है ।
असफ़लताऐं तो सफ़लता की सीढ़ीयाँ हैं ।
प्रशंसा को प्रोत्साहन और निंदा को चेतावनी मानने वाले ही सफ़ल होते हैं ।
क्षु. श्री ध्यानसागर जी
विधि के विधान के ख़िलाफ गये तो व्यवधान,
स्वीकारा तो समाधान ।
चाँद* में दाग है,
सूरज** में आग है ,
भगवान वीतराग है ।
* राग का प्रतीक
** द्वेष का
A boy asked his Dad, “Dad, how big is God?”
Looking up at the sky his father saw an aeroplane and asked his son, “How big is that aeroplane?”
The boy responded, ” It’s small, Dad! You can hardly even see it!”
Then the father took his son to an airport hanger. Standing in front of one of the aeroplane, the father asked, “And now, how big is the aeroplane?”
The boy responded, ” Oh Daddy, this plane is enormous.”
At this point, the father said to him, “That’s how it is with God. How big he is depends on the distance between you and Him. The closer you are to Him, the bigger He is in your life”.
(Happy-Mumbai)
If you believe that only visits to temple will make you religious,
then mechanics spending whole life in garage must have converted into cars !!
भला बने रहकर किसी का बुरा होते देखने से बेहतर है,
बुरा बनकर भला करने का प्रयास करना ।
चिंतन
संसार से भागो मत,
संसार को भोगो मत,
संसार के कारणभूत कर्मों को भगाओ ।
विभीषण के राम की शरण में आते समय सलाहकारों ने कहा – वह धोखा दे सकता है ।
राम – धोखा देना पाप है, खाना पाप नहीं ।
धोखा खाने वाला मंदबुद्धि नहीं, सरलबुद्धि होता है ।
क्षु. श्री ध्यानसागर जी
कुटुम्बी माल खाने को तैयार रहते हैं,
मार पड़ने पर आपको आगे कर देते हैं ।
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