ऊँचा उठने के लिए पंखों की ज़रुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है..
मनुष्य तो जितना विनम्रता से झुकता है,
उतना ही ऊपर उठता है ।

(मंजू)

पहाड़ चढ़ने वाला व्यक्ति झुककर चलता है,
और उतरने वाला अकड़ कर चलता है |

कोई अगर झुककर चल रहा है, मतलब ऊँचाई पर जा रहा है,
और कोई अकड़ कर चल रहा है, मतलब नीचे जा रहा है |

हमेशा होली (राग द्वेष की कीचड़) रही है,
एक बार दिवाली (ज्ञान का प्रकाश) आ जाये , तो होली आयेगी ही नहीं/ होली हो ली ।

आचार्य श्री विद्या सागर जी

2) दिवाली दियों का/ प्रकाश का पर्व है,
दियों से दिये जलायें,
धुयें रूपी अंधकार/ प्रदूषण न फैलायें,
अपनी खुशी में किसी के घर का दिया न बुझ जाय ।

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