“अहंकार”
तभी उत्पन्न होता है
जब
गुणों का स्वामी यह भूल जाता है कि
“प्रशंसा”
वास्तव में उसकी नहीं
बल्कि
उसके “गुणों” की हो रही है।
(अभिषेक-देहली)
रूचिकर को छोड़, हितकर मार्ग ।
समस्या मार्ग को छोड़, तपस्या मार्ग ही मोक्ष मार्ग है ।
संसार में तो प्रमादी को भी लाभ हो सकता है,
प्रमुखता पुण्य की है ।
लेकिन
परमार्थ में प्रमादी प्रगति नहीं कर सकता ।
रत्नत्रय
Those who do not remember the PAST,
are bound to repeat mistakes of the PAST.
Those who repeatedly remember the PAST,
are bound to be in sorrow.
चिंता करने से परेशानियाँ बढ़तीं हैं,
ख़ामोश रहने से कम होती हैं ,
भगवान को याद करने से खुशियों में बदल जाती हैं ।
(अंजना)
बोलने से पहले वचन आदमी के गुलाम होते हैं,
बोलने के बाद आदमी वचनों का ।
(सुरेखा – भोपाल)
अपने में भावित, दूसरों से अप्रभावित रहने वाला ही, सहज रह पाता है ।
जो भी दिख रहा है वह आत्मा नहीं ।
जो देख रही है, वह आत्मा है ।
व्यवहारिक दृष्टिकोण – अच्छा दिखूँ,
आध्यात्मिक दृष्टिकोण – अच्छा बनूँ ।
जो रोज़ मरता है (पर दुखी नहीं होता),
वह मर्द ।
परीक्षा की ज़िंदगी में सफलता इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं,
जितनी ज़िंदगी की परीक्षा में ।
संस्थाऐं भी शरीर की तरह बूढ़ी होती रहतीं हैं ।
समाधान है-
परिवर्तन,
तब ये हमेशा युवा रह सकतीं हैं ।
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