मैं रूठा, तुम भी रूठ गए
फिर मनाएगा कौन ?
आज दरार है, कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?
बात छोटी को लगा लोगे दिल से,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?
न मैं राज़ी, न तुम राज़ी,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?
एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?
मूंद ली दोनों में से ग़र किसी दिन एक ने आँखें….
तो कल इस बात पर फिर
पछताएगा कौन ?
मुनिश्री क्षमासागर जी
यदि हर कोई आप से ख़ुश है, तो ये निश्चित है कि आपने जीवन में बहुत से समझौते किये हैं ….
और यदि आप सबसे ख़ुश हैं, तो ये निश्चित है कि आपने लोगों की बहुत सी ग़लतीयों को नज़रअंदाज़ किया है ।
(नमिता-सूरत)
We can not become what we want to,
by remaining what we are.
(Suresh)
धन की रक्षा करनी पड़ती है,
धर्म हमारी रक्षा करता है ।
धन के लिए पाप करना पड़ता है,
धर्म में पाप का त्याग होता है ।
धन से धर्म नहीं आता,
धर्म से धन आता है ।
धन मित्रों को भी दुश्मन बना देता है,
धर्म दुश्मन को भी मित्र बना देता है ।
धन भय को उत्पन्न करता है,
धर्म भय को समाप्त करता है ।
धन रहते हुए व्यक्ति दुःखी है,
धर्म से व्यक्ति दुःख में भी सुखी है ।
धन से संकीर्णता आती है,
धर्म से विशालता ।
धन इच्छा को बढ़ाता है,
धर्म इच्छाओं को घटाता है ।
धन में लाभ-हानि चलती रहती है,
धर्म से फ़ायदा ही फ़ायदा ।
धन से कषाय बढ़ती है,
धर्म से कषाय शांत होती है ।
धन से रोग बढ़ता है,
धर्म से जीवन स्वस्थ बनता है ।
धन अशाश्वत है,
धर्म शाश्वत,परभव में भी साथ जाता है ।
(सुरेश)
किसी ने ख़ुदा से मौत माँगी !
खुदा ने कहा…
मौत तो तुझे दे दूँ, मगर उससे क्या कहूँ !!
जिसने तेरी ज़िंदगी की दुआ माँगी !!!
(श्रीमती शर्मा)
परिस्थिति पाप नहीं कराती,
पाप तो मन:स्थिति से होता है।
जिस परिस्थिति में रागी, पाप करता है;
उसी परिस्थिति में वैरागी पुण्य करता है ।
(क्षु.श्री ध्यान सा.जी)
जो वस्तु को जला दे, उसे आग कहते हैं ।
जो जीवन को जला दे, उसे राग कहते हैं ।
जो जीवन को उठा दे, उसे त्याग कहते हैं ।
जो मुक्ति में पहुँचा दे, उसे वैराग्य कहते हैं ।
(ब्र.संजय)
कंडक्टर सी हो गयी है ज़िंदगी,
जाना भी रोज़ का है
और
जाना कहाँ मालूम नहीं !
थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ ज़िंदगी,
बहतर हो मेरा हिसाब कर दे ।
(जे.पी.शर्मा)
Best MANAGEMENT is…
SELF-management.
गोपालदास नीरज जी की एक रचना……
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों!
मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
चंद खिलौनों के खोने से
बचपन नहीं मरा करता है।
लूट लिया माली ने उपवन,
लुटी न लेकिन गंध फूल की,
कुछ मुखड़ों की नाराज़ी से
दर्पण नहीं मरा करता है।।
कुछ स्वप्नों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है….
(अरुणा)
विभीषण, रावण के साथ रहकर भी नहीं बिगड़े !
केकैई, राम के साथ रहकर भी नहीं सुधरी !!
(तनेजा जी)
(ज़रूरी नहीं कि संगति का प्रभाव हो ही,
या सब पर एक सा हो)
“अकेलापन” इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है ! और
“एकांत” सबसे बड़ा वरदान !!
“अकेलेपन” में छटपटाहट है, घबराहट है;
तो “एकांत”में आराम, शांति ।
जब तक हमारी नज़र बाहर की ओर है, तब तक हम “अकेलापन” महसूस करते हैं
और
जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी
तो “एकांत” अनुभव होने लगता है।
ये जीवन और कुछ नहीं वस्तुतः
“अकेलेपन” से “एकांत” की ओर एक यात्रा है !!
(ब्र.संजय)
एक बकरी के पीछे शिकारी कुत्ते दौड़े। बकरी जान बचाकर अंगूरों की झाड़ी में घुस गयी। कुत्ते आगे निकल गए। बकरी ने निश्चिंतापूर्वक अँगूर की बेलें खानीं शुरु कर दीं और ज़मीन से लेकर अपनी गर्दन पहुचे, उतनी दूरी तक के सारे पत्ते खा लिए। पत्ते झाड़ी में नहीं रहे। छिपने का सहारा समाप्त हो जाने पर कुत्तों ने उसे देख लिया और मार डाला !
सहारा देने वाले को जो नष्ट करता है, उसकी ऐसी ही दुर्गति होती है।
मनुष्य भी आज सहारा देने वालीं जीवनदायिनी नदियों, पेड़ पौधों, जानवरों, पर्वतों आदि को नुकसान पहुँचा रहा है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओं के रूप में भोग रहा है।
(आर.के.गुप्ता)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर

Recent Comments