जितना बड़ा “प्लोट” होता है उतना बड़ा “बंगला” नहीं होता,
जितना बड़ा “बंगला” होता है उतना बड़ा “दरवाजा” नहीं होता,
जितना बड़ा “दरवाजा” होता है उतना बड़ा “ताला” नहीं होता,
जितना बड़ा “ताला” होता है उतनी बड़ी “चाबी” नहीं होती ।
परन्तु “चाबी” का पूरे बंगले पर अधिकार होता है।

इसी तरह मानव के जीवन में बंधन और मुक्ति का आधार सूक्ष्म मन की चाबी पर ही निर्भर होता है।

(अपूर्व श्री)

एक बार अंगूर ????????????खरीदने के लिए एक फल बेचने वाले के पास रुका..
पूछा:
क्या भाव है गुच्छों???????????????????????????? का ?
बोला :
80 रूपये किलो ।
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पड़॓ थे ।
मैंने पूछा :
क्या भाव है इन का ?
वो बोला :
30 रुपये किलो
मैंने पूछा :
इनका इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला :
साहब, हैं तो ये भी बहुत बढ़िया
पर अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।

मैं समझ गया कि अपने संगठन/समाज और परिवार से अलग होने पर हमारी कीमत आधे से भी कम रह जाती है।

एकता में बल है ।

(अरविंद)

 

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