विभीषण, रावण के साथ रहकर भी नहीं बिगड़े !
केकैई, राम के साथ रहकर भी नहीं सुधरी !!

(तनेजा जी)

(ज़रूरी नहीं कि संगति का प्रभाव हो ही,
या सब पर एक सा हो)

“अकेलापन”  इस संसार में सबसे बड़ी सज़ा है !    और
“एकांत” सबसे बड़ा वरदान !!

“अकेलेपन” में छटपटाहट है, घबराहट है;
तो “एकांत”में आराम, शांति ।

जब तक हमारी नज़र बाहर की ओर है, तब तक हम “अकेलापन” महसूस करते हैं
और
जैसे ही नज़र भीतर की ओर मुड़ी
तो “एकांत” अनुभव होने लगता है।

ये जीवन और कुछ नहीं वस्तुतः
“अकेलेपन” से “एकांत” की ओर एक यात्रा है !!

(ब्र.संजय)

एक बकरी के पीछे शिकारी कुत्ते दौड़े। बकरी जान बचाकर अंगूरों की झाड़ी में घुस गयी। कुत्ते आगे निकल गए। बकरी ने निश्चिंतापूर्वक अँगूर की बेलें खानीं शुरु कर दीं और ज़मीन से लेकर अपनी गर्दन पहुचे, उतनी दूरी तक के सारे पत्ते खा लिए। पत्ते झाड़ी में नहीं रहे। छिपने का सहारा समाप्त हो जाने पर कुत्तों ने उसे देख लिया और मार डाला !

सहारा देने वाले को जो नष्ट करता है, उसकी ऐसी ही दुर्गति होती है।

मनुष्य भी आज सहारा देने वालीं जीवनदायिनी नदियों, पेड़ पौधों, जानवरों, पर्वतों आदि को नुकसान पहुँचा रहा है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओं के रूप में भोग रहा है।

(आर.के.गुप्ता)

जब कण कण में भगवान हैं तो तुम मंदिर क्यों जाते हो ?

हवा तो धूप में भी चलती है पर आनंद छाँव में बैठ कर ही मिलता है,
वैसे ही भगवान सब तरफ़ है पर आनंद मंदिर में ही आता है ।

(अंजना-शिवपुरी)

एक ड़ाल पर दो उल्लू,
एक के मुँह में साँप, दूसरे के में चूहा;
साँप के मुँह में पानी(1), चूहे का मुँह भयभीत(2) ।
(1) चूहे को देखकर
(2) साँप को देखकर

विड़म्बना-
(1) आहार की लोलुपता के आगे
तथा
(2) भय के आगे
मौत भी अदना लगने लगती है ।

नंगे पाँव चलते “इन्सान” को लगता है
कि “चप्पल होती तो कितना अच्छा होता”
फिर ऐसा लगा कि………
“कार होती तो धूप नहीं लगती”
फिर लगा कि,
“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझट नहीं होता”
जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदान देखता है तो सोचता है कि,
“नंगे पाव घास में चलता तो दिल को कितनी तसल्ली मिलती !”

(जे.पी.शर्मा)

नल बंद करने से नल बंद होता है, पानी नहीं!
घड़ी बंद करने से घड़ी बंद होती है,समय नहीं!
दीपक बुझाने से दीपक बुझता है, रोशनी नहीं!

झूठ छुपाने से झूठ छुपता है, सत्य नहीं!

(कट्टू-विदिशा)

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30