इंसान भी कैसा अजीव है …!
जीते समय सोचता है कि कभी मरुँगा नहीं,
मरते समय लगता है जैसे कभी जीया ही नहीं ।

(सुरेश)

छाछ में मक्खन हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन मक्खन में छाछ नहीं होनी चाहिए।
कोयले में हीरा आ जाये तो कोई बाधा नहीं, लेकिन हीरा लेते हुए कोयला नहीं आना चाहिए।
ज़हर में मिलावट हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन मिठाई में ज़हर की मिलावट नहीं होनी चाहिये।
पानी में नाव हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन नाव में पानी नहीं होना चाहिये।

इसी तरह
संसार में रहते हुए प्रभु की याद आती है तो कोई बाधा नहीं,
परंतु
प्रभु भक्ति में संसार की याद नहीं आनी चाहिए।

(सुरेश)

ज़िन्दगी कभी आसान नहीं होती,
इसे आसान बनाना पड़ता है…

कुछ को स्वीकार करके,
कुछ को नज़र अंदाज करके,
कुछ को बर्दाश्त करके,
और जब तीनों से काम न चले तब प्रतिकार करके ।

जिसे पाकर लगे कि अपने को पा लिया,
समझना कि वह अपना है;
जिसे पाकर लगे कि अपने को खो दिया,
तो मानना कि वह और भी अपना है ।

गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी

( जिसे खो कर लगे कि सब कुछ खो गया,
तो जानना वह सबसे ज्यादा अपना था )

जहाँ तरलता थी, मैं डूबता चला गया ;
जहाँ सरलता थी, मैं झुकता चला गया ;

संवेदनाओं ने मुझे जहाँ से छुआ,
मैं वहीं से पिघलता चला गया ।

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April 8, 2022

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