मुहूर्त तो शादी (फंसने) के लिये देखा जाता है, तलाक (निकलने) के लिये नहीं ।
मुनि श्री कुंथुसागर जी

1) हो-ली…जो बीत गयी सो बात गयी।
2) हो-ली…मैं धर्म की हो-ली।
3) Holy…Purity.
(Neelam)
एक ही सिक्के के दो पहलू हैं…
प्रसन्नता और सम्पन्नता ।
संसार/पाश्चात्य में संपन्नता को प्रमुखता,
धर्म/पूर्व में प्रसन्नता को ।
वासना से वात्सल्य की यात्रा ।
स्वेच्छाचारिता पर नियंत्रण ।।
सफलता कभी भी “पक्की” नहीं होती,
और
असफलता कभी भी “अंतिम” नहीं होती।
इसलिये अपनी कोशिश को
तब तक जारी रखो, जब तक आपकी,
“जीत” एक “इतिहास” ना बन जाए !
A ‘Desire’ changes nothing,
A ‘Decision’ changes something
but..
A‘Determination’changes everything.
(Divya-London)
छाछ में मक्खन हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन मक्खन में छाछ नहीं होनी चाहिए।
कोयले में हीरा आ जाये तो कोई बाधा नहीं, लेकिन हीरा लेते हुए कोयला नहीं आना चाहिए।
ज़हर में मिलावट हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन मिठाई में ज़हर की मिलावट नहीं होनी चाहिये।
पानी में नाव हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन नाव में पानी नहीं होना चाहिये।
इसी तरह
संसार में रहते हुए प्रभु की याद आती है तो कोई बाधा नहीं,
परंतु
प्रभु भक्ति में संसार की याद नहीं आनी चाहिए।
(सुरेश)
अपने छोड़ कर क्यों चले जाते हैं ?
जो छोड़ कर चले जाते हैं वे अपने हो ही नहीं सकते ।
( आर.के.गुप्ता )
ज़िन्दगी कभी आसान नहीं होती,
इसे आसान बनाना पड़ता है…
कुछ को स्वीकार करके,
कुछ को नज़र अंदाज करके,
कुछ को बर्दाश्त करके,
और जब तीनों से काम न चले तब प्रतिकार करके ।
“निंदा” और “नींद”
पर जो व्यक्ति – विजय पा लेते हैं,
उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता ।
(धर्मेंद्र)
On an Old Man’s shirt was written a cute sentence
‘I Am Not 60 Years Old.., I Am Sweet 16 with 44 years Experience.’
That’s
ATTITUDE
(Parul – Delhi)
जिसे पाकर लगे कि अपने को पा लिया,
समझना कि वह अपना है;
जिसे पाकर लगे कि अपने को खो दिया,
तो मानना कि वह और भी अपना है ।
गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी
( जिसे खो कर लगे कि सब कुछ खो गया,
तो जानना वह सबसे ज्यादा अपना था )
जहाँ तरलता थी, मैं डूबता चला गया ;
जहाँ सरलता थी, मैं झुकता चला गया ;
संवेदनाओं ने मुझे जहाँ से छुआ,
मैं वहीं से पिघलता चला गया ।
जुगनू की चमक, उसके सक्रिय होने पर ही दिखती है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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