Man in God’s shop
Lord what do you sell?
God whatever your heart desires.
Man:-I want Peace, Happiness & freedom.
God smiled:- sorry child-I sell seeds, not fruits.

(Neelam)

पाप(करना पड़े तो) ऐसे करें जैसे कड़वी दवाई खायी जाती है,
पुण्य जैसे मिठाई खाते हैं ।

पाप का फल मिठाई की तरह खाकर समाप्त करें,
पुण्य का फल कड़वी दवा जैसा ।

वृद्ध अतीत में जीता है, इसलिए निराश रहता है।
युवा भविष्य में जीता है, इसलिए निराश रहता है।
बच्चा वर्तमान में जीता है, इसलिए सदैव प्रसन्न रहता है।
हम तीनों में जीते हैं, इसलिये कभी निराश(2/3) कभी प्रसन्न(1/3) रहते हैं ।

(ब्र.संजय)

पं श्री जगमोहनलाल जी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा – आपको वैराग्य कैसे हुआ ?

आचार्य श्री – आप लोगों के चेहरों को देख देख कर ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

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April 8, 2022

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