• कर्मफ़ल की अस्वीकृति
  • आत्मग्लानी (प्रायश्चित के अभाव में)
  • पर निन्दा / आत्मप्रशंसा
  • भय

क्षु.श्री ध्यान सा.जी

1) चाहिये – इच्छा बढ़ेगी (“सकता” से योग्यता )
2) पड़ेगा -मजबूरी
3) लेकिन – अच्छे को बुरे से जोड़्ता है
4) भूलना मत – प्रयोग करें “याद रखना”

क्षु.श्री ध्यान सा.जी

भावों को दर्शाने का माध्यम और सबसे अच्छी अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही हो सकती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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