Independent बनने के लिए बिटिया लोगों को कितनों की Dependency सहनी पड़ती है। कई बार तो अपमानजनक स्थिति का भी सामना करना होता है (विशेष परिस्थितियाँ अपवाद हैं)।
अर्थोपार्जन के स्थान पर परिवारोपार्जन करें तो अनेक फायदे।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 16 जून)

जो दूसरों को जिंदा न रहने दे, उसे जिंदा नहीं कह सकते/ उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं।
2) जो गुरु/ भगवान के सामने अकड़ा रहे (मुर्दे जैसा) उसे जिंदा कैसे कहें !

चिंतन

धर्म स्व-आश्रित ही नहीं, पर निमित्तक भी है।
साधुजन भी गृहस्थों की भोजन व्यवस्था लेते हैं।
काया के आश्रित तो साधु तथा गृहस्थ दोनों रहते हैं।
आज के समय में पुरुषार्थ भी शरीर के आश्रित है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

ना काफ़ी (मिठास), नाही फीका, सच्ची मिठास प्राकृतिक।
काफ़ी मिठास – जलेबी में पर मायाचारी का प्रतीक,
फीका मिठास – रसगुल्ले में पर मिलावटी (पनीर + आटा),
प्राकृतिक मिठास – गन्ने का Pure, फायदेमंद।

मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

मैं बुद्ध होने उठा, आशा ही दुःख का कारण है, सोचकर सो गया।
मुझसे वक़्त (समय) पूछा किसी ने, बुरा चल रहा है।
मैंने चाहा जख्म भर जाये, जख्म ही जख्म हो गये।
बेटी → भगवान मेरे पिता को अच्छा दामाद मिल जाये, छोटी बहन को अच्छा पति मिल गया।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

उन्नति आगे बढ़ना नहीं, ऊपर उठना है।
अवरोध आने पर पानी ऊपर उठता है।
हमारे जीवन में भी व्यवधान आयें तो उनको हटाने में अपनी शक्ति जाया न करें, उनको सीढ़ी बनाकर ऊपर उठें, तब ही उन्नति होगी।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 जून)

पॉजिटिव थिंकिंग यह नहीं कि “मैं कर ही लूंगा” बल्कि वह जिसका रियलिस्टिक थिंकिंग से तालमेल हो।
जैसे इंटरव्यू में “मैं क्लियर कर ही लूंगा” नहीं, मैं कंपनी के फायदे की सोचूँगा, सेलेक्ट हो गया तो कंपनी का फायदा, सेलेक्ट ना होने पर भी अफ़सोस नहीं बल्कि सोचूँगा, यह तो कंपनी का ही नुकसान हुआ !

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

बीज को मुट्ठी में पकड़े रहने से उसकी सुरक्षा नहीं/ उसकी संतति नहीं।
माटी को मान देने से मान रूपी बीज जब अपना मान समाप्त कर देता है तब वह वृक्ष बनकर सबका सम्मान पाता है।
अपना मान मिटाने से ही सम्मान मिलता है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

पहला धन्यवाद परमात्मा को जो हमारे आदर्श और लक्ष्य है।
2) गुरु को जिन्होंने बताया परमात्मा कौन होते हैं और उन तक कैसे जाया जा सकता है।
3) माता-पिता को जिन्होंने साधन उपलब्ध कराये।
4) साधर्मी भाइयों को जिन्होंने उस रास्ते पर चलने में मेरा साथ दिया।
अंतिम स्वयं को कि आपने इन चार का लाभ उठाने का साहस किया।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

मैच्योर/ पॉजिटिव थिंकिंग किस अवस्था में ?
मुनि अवस्था में।
रियलिस्टिक थिंकिंग किस उम्र में‌ ?
ओल्ड/ वृद्धावस्था में। ऐसा व्यक्ति वृद्धाश्रम जाते समय भी कर्मसिद्धांत स्वीकार लेता है।
ऐसा कौन जो वृद्ध भी हो और महान संत भी ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 9 जून)

संसारी माँ बच्चों को लोरी सुलाने के लिये सुनाती है।
धर्म-माँ* बड़ों को जगाने के लिये।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

*जिनवाणी (धार्मिक ग्रंथ)/ गुरु-वाणी।

इस वर्तमान ऋतु में पित्त का प्रकोप बहुत होता है। उससे बचने के लिए खटाई (किसी भी तरह की चाहे वह नींबू की हो या कच्चे आंवले की। अगले माह में भी नहीं), उड़द, बीन्स, मिर्च/ मसाले, तेल नहीं लेना चाहिए। हाँ ! सूखा आंवला ले सकते हैं जो कसैला होता है।
गुड़, शीतल अनाज जैसे ज्वार, केले, अनार, लौकी लेना चाहिए।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 17 सितम्बर)

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