बच्चों को मुक्त कराने की प्रक्रिया में ,
अपने आप को मैं पल पल मुक्त होता अनुभव कर रहा हुँ।

(कैलाश सत्यार्थी- नोबल प्राईज-2014)

दो लाइनों के बीच का भाव बहुत महत्वपूर्ण होता है।
इनके बीच में ऐसे adjust हो जाओ कि लाइनों को खिसकना न पडे।
महत्वपूर्ण स्थान पालोगे।

प्रश्न – लाइनों की लिखावट अच्छी न हो / लम्बी लम्बी मात्रायें चुभ रही हों, तब कैसे adjust करें ?
उत्तर – ये लिखावट / लाइनों के बीच का कम gap ,किसकी कृति है ?
तुम्हारी न !
झेलेगा कौन ??

चिंतन

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