Every day starts with some expectation,
and every day ends with experience.
This is Life.
Where expectations end,
experiences start.

(Mrs.Divya from London)

धर्माचरण का उद्देश्य पाप काटना हुआ तो फल आधा मिलेगा,
पाप त्यागने का उद्देश्य हुआ तो फल पूरा तथा तुरंत शुरू ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

कोरा ज्ञान अच्छा नहीं माना जाता ।
क्यों ?

कोरा कपड़ा नहीं पहना जाता, धुलकर ही पहनने लायक होता है ।

ज्ञान चारित्र/अनुभव से जब धुल जाता है/ परिष्कृत हो जाता है, तब उपयोगी बन जाता है ।

चिंतन

लंका विजय के बाद श्री राम सबको दो पद (राजा/मंत्री) दे रहे थे ।
हनुमान ने भी दो पद माँगे, वे पद थे – श्री राम के दो पद ।

जिसने गुरू/भगवान के दो पद पालिये, उसे संसार के सारे पद मिल जाते हैं, वह परमपद को प्राप्त कर लेता है ।

आर्यिका श्री विनतमति माताजी

हर चक्की वाला अपनी चक्की सप्ताह में एक दिन बंद रखता है, तुम अपनी चक्की हर दिन, हर समय क्यों चलाते रहते हो ?

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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