बुढ़ापा अनुभवों की गठरी है ।
पर उसे खोल खोल कर देखना और दिखाना चाहिये ।

पतझड़ भी सुंदर लग सकता है, यदि देखने की दृष्टि सकारात्मक हो तो ।

(शशि)

रावण पूरा जीवन चक्र हासिल करने में लगा रहा पर उसके जीवन का अंत उसी चक्र से हुआ ।
हम सब भी संसार के चक्कर में चक्र की तरह घनचक्कर हो रहे हैं ।
हमारा अंत भी, यही हमारा ही चक्कर करेगा ।

मुनि श्री विश्रुतसागर जी

बहुत सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाज़े पर लिखे थे ।

अगर तुम अन्याय, अत्याचार और पाप करते करते थक गए हो तो अंदर आ जाओ ।
… क्यूंकि …
भगवान मेहरबानियाँ करते करते अभी नहीं थके हैं ।

परोक्ष में निंदा से उसका (जिसकी निंदा की जा रही है) बुरा नहीं, निंदा करने वाले का अवश्य,
प्रत्यक्ष में निंदा से उसका भला, अपना भी ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

रावण ने पूरी ज़िंदगी भोग भोगे, राम ने वनवास ।
रावण को हर साल रामलीला मैदान में जलाया जाता है, राम को मोक्ष सुख हमेशा हमेशा के लिये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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