अधूरे तो हम सब हैं,
पर ज्ञानी इस अधूरेपन को दूर करने में लगातार प्रयत्नशील रहता है ।
अज्ञानी प्रयत्न नहीं करता, बस दु:खी रहता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

मंदिर के बाहर भीख मांगते एक भिखारी से एक सेठ बोला – यहां खड़े होकर भीख मांगने में शर्म नहीं आती !
भिखारी – साब ! आती तो थी !
पर मैंने इसके लिए एक प्रयोग किया-
एक दिन मैं मस्जिद के बाहर खड़ा हुआ, एक दिन मैं चर्च के बाहर गया, एक दिन गुरूद्वारे के बाहर भीख मांगी
जब मैंने हर जगह देखा, आप सब भी अंदर जा कर यही करते है, तो अब हिम्मत आ गई है !!!

एक आदमी ने देखा कि एक गरीब बच्चा उसकी कीमती कार को बड़े
गौर से निहार रहा है।
आदमी ने उस लड़के को कार में बिठा लिया।
लड़के ने कहा:- आपकी कार बहुत अच्छी है, बहुत कीमती होगी ना ?
आदमी:- हाँ, मेरे भाई ने मुझे गिफ्ट दी है।
लड़का (कुछ सोचते हुए):- वाह ! आपके भाई कितने अच्छे हैं ।
आदमी:- मुझे पता है तुम क्या सोच रहे हो, तुम भी ऐसी कार
चाहते हो ना ?
लड़का:- नहीं ! मैं आपके भाई की तरह बनना चाहता हूँ ।

आज का विचार…
“अपनी सोच हमेशा ऊँची रखें, दूसरों की अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा ऊँची” !!

(श्रीमति नमिता – सूरत)

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