Sometimes we fail to understand the feelings of very close people in our life…
Because a book held nearer to eyes is very difficult to read…

(Mrs. Neelam – Delhi)

बताना तो ठीक है, पर मनवाने से कषाय पैदा होती है ।
समझाना तो ठीक है, पर सामने वाले की समझ में आया या नहीं, उलझने का काम है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मंदिर की क्या जरूरत है, भगवान तो हमारे दिल में है ?

आपके प्रियजन भी तो आपके दिल में हैं, फिर उनसे मिलने क्यों जाते हो ??

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

लोग मंज़िल को मुश्किल समझते हैं,
हम मुश्किल को मंज़िल समझते हैं |
बडा फ़र्क है लोगों में और हम मैं,
लोग ज़िंदगी को दोस्त और हम दोस्त को ज़िंदगी समझते हैं ||
आदतें अलग हैं हमारी दुनियाँ वालों से,
कम दोस्त रखते हैं मगर लाज़वाब रखते हैं |
क्योंकि बेशक हमारी माला छोटी है,
पर फूल उसमे सारे गुलाब रखते हैं ||

अज्ञान दशा में जोड़ा है (जरूरत से ज्यादा) तो ज्ञान दशा में छोड़ दो ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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