किसकी बात मानें ?
मन की ?
मन तो मोह में मदहोश रहता है !!

दूसरों की ?
वे भी रागीद्वेषी हैं, सही सलाह कैसे देंगे !!

सच्चे देव, गुरू. शास्त्र की मानो,
उन्हें सुनकर, समझकर अपने विवेक की मानो ।

चिंतन

यदि मंदिर सिर्फ मंदिर जाने के लिये जा रहे हो तो याद रखना उस मंदिर के चूहे आदि बनोगे ।
यदि अपने अंदर जाने के लिये जा रहे हो तो मंदिर के अंदर बैठे भगवान बनोगे ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

आँखों में कचरा गिरते समय, पलकें कचरे से आँखों को बचाने का पूरा प्रयास करतीं हैं, चाहे कचरा गिरे या आँखें बचें ।
दांतों में कुछ फंसने पर जीभ उसे निकालने का लगातार प्रयास करती रहती है चाहे डॉक्टर भी तिनका निकालने में लगा हो ।

श्री लालमणी भाई

अर्थ* से अर्थ** के आकर्षण को अर्थहीन करें ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

* शास्त्र/गुरुवाणी के अर्थ
** धन दौलत

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