जिनको लगता है कि उनके फैसले रब करेगा,
वे बैठे हैं कि अब करेगा-अब करेगा।

(ब्र. डॉ. नीलेश भैया)

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे, “पाप मल है, पुण्य जल है। मल धोने के लिए जल आवश्यक है।”

आचार्य श्री समयसागर जी

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं।
एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि एक डलिया मिट्टी ले जाने दें ताकि उसकी खुशबू से परिवार सो सके। डलिया भारी थी पड़ोसी को निवेदन किया सिर पर रखवा दें। पड़ोसी उठा नहीं पाया।
बुढ़िया –> एक डलिया मिट्टी का बोझ नहीं उठा पा रहे हो, पूरी जमीन की मिट्टी का बोझ कैसे सहन कर पाओगे !

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

पुरुषार्थ पहले या भाग्य ?

सुभाष

भाग्य से ही पुरुषार्थ कर पाते हैं। तब और ज्यादा अच्छा भाग्य बन जाता है,
फिर ज्यादा पुरुषार्थ कर पाते हैं।
जैसे पूँजी (भाग्य) लगाने से व्यवसाय (पुरुषार्थ)।
पूँजी बढ़ती जाती है, साथ-साथ व्यवसाय भी।

चिंतन

कुम्हार अपने 5 गधों पर 5 सामग्रियाँ Overload करके रोज़ाना बेचने जाता था।

    • अत्याचार –> राजा आदि के लिए।
    • अहंकार –> सेठ आदि, नये धनपतियों के लिए।
    • ईर्ष्या –> नये पण्डितों/ ज्ञानियों के लिए।
    • बेईमानी –> व्यापारियों के लिए।
    • छल-कपट/ मायाचार –> महिलाओं के लिए।

खरीदने वाले हम ही तो हैं।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

कार के टायर के नीचे आने से पैर कुचल गया।
पर टायर तो रबड़ का और रबड़ मुलायम ?
हवा भर दी सो कठोर हो गया।

मनुष्य में भी हवा भर दो तो वह कठोर हो जाता है। अन्यथा उसका स्वभाव तो
कोमल/ विनम्र होता है।

चिंतन

शाबाशी अच्छे/ बुरे कामों पर भी। इससे अहंकार आता है।
आशीष सिर्फ अच्छे कामों के लिये ही। इससे अहंकार घटता है।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

कर्म चोर बहु फिरत हैं…
यह कहावत सही नहीं है। कर्म तो साहूकार हैं, उनका कर्ज़ा कभी चुकता नहीं है।

मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी

(सही कहा है…ब्याज दर ब्याज लगती जाती है, एक कर्म उदय में आया, हमने रागद्वेष किया। कटा एक, बंधे चार)।

चिंतन

बच्चा माता पिता के बीच सो रहा है, सर्वाधिक सुरक्षित महसूस करता है। स्वप्न में शेर उसे खाने आया।
बचाएगा कौन ?
कोई संबंधी नहीं। सिर्फ़ जगना ही बचा सकता है।

चिंतन

राजा के प्रिय मंत्री की गलती पर राजा को सजा तो देनी ही थी।
सैनापति की राय थी – 1 लाख मुद्रा 100 कोड़े, सैनिक की 1 हजार मुद्रा 10 कोड़े, भिखारी की 10 मुद्रा , 1 दिन भोजन नहीं।
सबके अपनी बुद्धि/स्तर के अनुसार मापदंड थे।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031