धर्म जीवन नहीं देता है, जीने की कला देता है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

नीति से चपरासी बनना भी मंज़ूर होना चाहिए, अनीति के साथ चक्रवर्ती बनना भी उचित नहीं ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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