घड़े में जरा सी दरार पड़ जाये तो सारी छाछ निकल जाती है पर मक्खन घड़े में ही बना रहता है ।

हमारी श्रद्धा भी मक्खन जैसी होनी चाहिए ,जो छोटी मोटी दरार से ना निकलने पाये ।

चिंतन

कहते हैं – ऊंट एक तिनके के बोझ से बैठ जाता है ।

(वो तिनका, जिसके बाद वो और बोझा नहीं उठा पाता)

श्री सौरभ जैन – नोएड़ा

स्वर्ग/नरक जाने का फैसला, आखरी पुण्य/पाप क्रिया तय करती है ।

जो हमारे करीब हैं और रोज का मिलना जुलना है, उन्हें हमसे शिकायत बहुत हैं ,
जो हमसे दूर हैं और कभी कभी मिलना होता है, उन्हें हमसे कोई शिकायत नहीं ।

सो नज़दीकियों से अब हमें ड़र लगता है !!

(धर्मेंद्र )

ज़िंदगी भर एक ही भूल करते रहे,
दिल से रोये और चेहरे से हंसते रहे ।
चाह कर भी भूल सुधार नहीं पाये,
क्योंकि धूल थी चेहरे पर और आइना साफ करते रहे ।।

(श्री संजय)

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