We die to finish school, then we die to start college.
Then we die to start working, then we die to marry.
Then we die to retire !
And finally while dying, we realize that we forgot to live.

(Mr. Dharmendra)

महाराष्ट्र के IAS में Selected Candidates का सम्मान हो रहा था ।
135 वीं Rank वाले श्री बालाजी धूप का चश्मा लगाये हुये थे, क्योंकि गरीबी के कारण वे Street Light पढ़ते थे, उससे उनकी बायीं आंख की रोशनी चली गयी थी ।
Topper के बाद केवल उनको बोलने के लिये मंच पर बुलाया गया ।

उन्होंने कहा – I have lost my Left Eye, But I have not lost my right vision.

(श्रीमति निधि)

एक गांव वाला शहर आया, अंधेरा होने पर उसने दिया और माचिस मांगी,
बटन दबाकर बल्ब जला दिया गया ।
वह बोला – क्या चमत्कार है !

अज्ञानी को छोटी छोटी चीजें भी चमत्कार दिखाई देतीं हैं ।
हालांकि चमत्कारों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता ।

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी

ड़ाक्टर के मृत घोषित करने के बाद भी एक मुहूर्त (48 Minute)तक Wait करना चाहिये ।
क्योंकि सारे बाह्य लक्षणों के समाप्त होने पर भी, कभी कभी शरीर जीवित होते हुये देखा जाता है ।

आजकल पुरूषार्थ व्यायाम करने वाली साइकिल जैसा है ,
चलाते चलाते, पसीना पसीना हो जाते हैं पर पहुंचते कहीं नहीं ।

मुनि श्री सौरभसागर जी

मज़बूरी से त्याग करने  में पुण्य कम मिलता है, त्याग तो मज़बूती से होना चाहिये ।

वृद्धावस्था में इच्छायें कम होने से पुण्य कम मिलेगा, युवावस्था में उन्हीं चीजों का त्याग करने से पुण्य ज्यादा ।

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