गड़बड़ लोगों को Sand paper समझो,                                                                                           आप Smooth हो जाओगे,                                                                                                            Sand Paper अपना वज़ूद खो देगा।

आयुष जैन (गुना ) 12 साल के बच्चे ने  आचार्य श्री के श्री मुख से सुना कि एक शराबी हर समय शराब पीता था, उसे कहा गया कि कमरे के एक कोने से दूसरे कोने में जाओ तब शराब ना पीने का नियम ले लो । उसने नियम ले लिया, कमरे में एक कोने से दूसरे कोने में जाते समय छत गिर गई और वो मर गया, लेकिन मृत्यु के बाद देव बना, क्योंकि वह त्यागी मरा था ।

आयुष को भी Thalassemia बीमारी हो गयी | जब हालत बहुत बिगड़ने लगी और उसे इन्दौर Ambulance से ले जाने लगे, रास्ते में उसे घबराहट हुई उसके पिता ने कुछ खाने और दवा लेने का आग्रह किया तब आयुष ने कहा कि मैं तो नियम लेके चला हूँ कि जब तक इन्दौर नहीं पहुंच जाऊंगा, तब तक मेरा अन्न, जल और दवा का त्याग है।
आज आयुष अपना नियम द्रढ़ता से निभाते हुये प्राण त्याग कर, देवलोक को सिधार गये हैं ।                                                                                                                                                                    

मनीषा बुआ

 

छोटे-छोटे नियमों को द्रढ़ता से पालने वाले देवगति ही पाते हैं ।

शुभ सरस्वती है तथा लाभ लक्ष्मी है ।
पर हम सब लाभ ही लाभ के पीछे लगे रहते हैं ।
शुभ बढ़ा लो ( अपने पुरूषार्थ को धर्म में लगाकर ) और लाभ कम कर लो ( दान से ) तो जीवन में शुभ के साथ लाभ भी ज्यादा हो जायेगा ।
जैसे पंगत में मना करने पर और-और मिलता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मुसलमान समुदाय के अबुल कासिम गिलानी और सरमद, औरंगजेब बादशाह के समय फ़कीर हुये, जिन्होंने दिगम्बरत्व को अपनाया ।
बादशाह के पूछ्ने पर कि आप नग्न क्यों रहते हैं ?
उन्होंने ज़बाब दिया कि लिबास वो पहनते हैं जिनमें ऐब होते हैं,
और जिसने तुझे ये बादशाहत दी है उसी ने हमें ये लिबास दिया है, हम उसके दिये हुये लिबास को कैसे छोड़ दें ?

मुनि श्री क्षमासागर जी

कलकत्ता की तरफ विहार करते समय एक पुलिस एस. पी. साथ में चल रहे थे ।
उन्होंने गुरू श्री से पूछा – नग्नता से क्या संदेश मिलता है ?

गुरू श्री – कम से कम में काम चलायें, जो बचे वो दूसरों के काम आए, यह नग्नता का अर्थ-शास्त्र है ।

प्रश्न : – मारीच आदिनाथ भगवान से नाराज़ था तो उनके समवसरण में क्यों जाता था ?
उत्तर :- यह देखने जाता था कि समवसरण में क्या-क्या है, ताकि जब मैं अपना समवसरण बनाऊंगा तो इससे भी अच्छा बना सकूं । इनके उपदेश में क्या-क्या कमियां हैं, जिनको बाहर जाकर मैं Highlight कर सकूं ।

पं. रतनलाल बैनाडा जी

क्या हम  अपने गुरूओं के पास इस मन: स्थिति से तो नहीं जाते हैं !

रामलीला में हनुमान का Role करने वाला बीमार हो गया।
Director जल्दी जल्दी में एक हलवाई को Dialogue रटाकर 200 रू. में मना लाया ।
रावण के भयानक रूप को देखकर, हनुमान रूपी हलवाई ड़र कर भाग खड़ा हुआ ।

Director के पूछ्ने पर वह बोला कि – Acting करने को तो मैं तैयार था, पर उस रावण को सामने देख सब Dialogue भूल गया ।

ज्ञान यदि आचरण के साथ पक्का नहीं किया तो, मृत्यु को सामने खड़ा देख  सारा ज्ञान भूल जाओगे ।

खुरई में गुरू श्री से किसी ने पूछा कि क्या कुर्सी पर बैठकर जाप दे सकते हैं ?

गुरू श्री – यदि पालती लगाने में विकलता होती है, तो जाप ना देने से अच्छा है कि कुर्सी पर बैठकर जाप करें ।

श्री विमल चौधरी

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