Month: August 2026
सोला
सोला में 16 तरह की शुद्धि…. अन्न शुद्धि… अन्न, जल, अग्नि, कर्ता शुद्धि। क्षेत्र… प्रकाश, वायु, स्थान, गन्ध शुद्धि। काल… ग्रहण, शोक, रात्रि, प्रभावना काल
परिवार
परिवार…. परि = चारों ओर से। वार = 1. आघात/ चोट पहुँचाना। 2. अवसर/ चोटी पर पहुँचाना। हम कैसा परिवार विकसित कर रहे हैं !
संसार / मोक्ष
संसार में रह कर आनंद आ रहा है तो मोक्ष कैसे ! संसार में रहकर आनंद में रह रहे हो तो संसार कैसे !! ये
संसार / मोक्ष मार्ग
संसार मार्ग… जियो और जीने दो। मोक्ष मार्ग… न मरो (मोक्ष यानी अमरता), न मरने दो (मोक्षमार्गी को देखकर अन्य भी मोक्ष-पुरुषार्थ करके अमरता की
कुदेव
जहाँ भय वहाँ प्रीति नहीं। कुदेव से भय तो रहता ही है (नाराज़ होने पर परेशान करते हैं)। फिर उनसे प्रीति कैसे हो सकती है
काय-क्लेश / परिषह / उपसर्ग
काय-क्लेश में चलाकर काय को क्लेश दी जाती है। परिषह आतीं हैं उन पर मुनिराज जय प्राप्त करते हैं। उपसर्ग अचानक आते हैं। निर्यापक मुनि
पुण्य क्रियाएँ
घना कोहरा पूरे दिन छाया रहा। सूरज भी पूरे दिन ताप देता रहा, फिर भी कोहरा कम न हुआ। हमारी पुण्य क्रियाएँ भी ऐसी ही
संवर मार्ग
आचार्य श्री विद्यासागर जी ने संवर मार्ग छठे गुणस्थान से माना है क्योंकि सही में संवर तो गुप्ति, समिति से होता है, हालाँकि संवर की
व्यवहार / निश्चय
शुरू में व्यवहार अंत में निश्चय। एक बच्चा पिता के साथ मेला गया। बच्चा खिलौने के लिए जिद कर रहा था। थोड़ी देर में पिता
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