Month: August 2026
सम्यक् प्रकृति
मिथ्यात्व का रस अनंतगुणा हीन तब सम्यक् मिथ्यात्व। सम्यक् मिथ्यात्व का रस अनंतगुणा हीन तब सम्यक् प्रकृति। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/9)
आत्मा
आत्मा गुब्बारे जैसी है… जन्म के समय बिंदु के आकार की। कर्मों के अनुसार आकार बढ़ता तथा Shape लेता जाता है। जैसे गुब्बारे में हवा
शिथलाचार
श्री कषायपाहुड में आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने कहा है… उच्च साधना वाले तथा हल्की साधना वालों को एक श्रेणी में नहीं रखना चाहिये। उच्च साधना
साधना
भावना… मन में उस भाव को बार-बार लाना ताकि मन उस भाव के लिए तैयार/ संस्कारित हो जाए। जैसे 16 प्रहरी पीपल बहुत असरदार होती
भक्ति
भक्ति करने से गुणों से जुड़ जाते हैं, प्रसन्नता/ विनम्रता आती है। जिसकी भक्ति की जाती है उसके गुण आने लगते हैं। बहुश्रुतवान की भक्ति
कारुण्य भाव
दुखियों के प्रति कारुण्य भाव रखना/ हृदय द्रवित होना अच्छा है, पर दु:खी नहीं होना (दूसरों के दु:ख को अपने ऊपर ओढ़ना नहीं)। कारण/ फायदा
निमित्त
शेर खतरनाक फिर भी उसकी उपमा दी जाती है। कुत्ता वफ़ादार उसकी क्यों नहीं ? शेर डंडे/ तलवार को न पकड़ कर मारने वाले (कर्म)
सफलता का रहस्य
अमेरिका के बड़े धनी एंड्रयू कार्नेगी ने सफलता का रहस्य वबताया… सोने की खदानों में टनों मिट्टी हटाने/Ignore करने पर एक/दो ग्राम सोना नज़र आता
विकार / पुरुषार्थ
शीतल जल गर्म हुआ अग्नि (खराब परिस्थितियों) के सम्पर्क में आने से। पुरुषार्थ से जल को अग्नि से दूर किया तो विकार से स्वभाव (शीतलता)
पैसा
जैसे-जैसे पैसा बढ़ता जाता है, शून्यता भी बढ़ती जाती है(1, 10, 100…..)। इसीलिए बुजुर्गों ने 11-101 आदि की भेंट शुरू करी ताकि एकता(1) बढ़े। गौरव
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