Month: August 2026

इंद्रिय नियंत्रण

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते हैं… आंख खोली तो पाप लगता है, पैर चले तो हिंसा। तो क्या करें ? कम से कम आंख खोलें।

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आत्मविश्वास

“छाता” बारिश तो नहीं रोक सकता, पर “बारिश” में खड़े होने का “साहस” ज़रूर देता है। ठीक उसी तरह “आत्मविश्वास,”सफलता” की गारंटी तो नहीं देता,

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मंगलाचरण

मंगलाचरण में 6 अधिकार (चीजें) होते हैं… जैसे द्रव्यसंग्रह के मंगलाचरण में… मंगल…जो पुण्य ले आए/ पापों को गलाये। यहाँ श्री ऋषभदेव भगवान का नाम।

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सुखी

सबसे करीब हमारी आत्मा, लेकिन करीब रहते हैं दूसरों की आत्मा के। “स्व” के ऊपर श्रद्धालु ही “पर” श्रद्धालु हो सकता है। जो ख़ुद सुखी

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गुप्ति

वचन गुप्ति – प्रवृत्यात्मक… भाषा को हित, मित, प्रिय (समिति-पूर्वक बोलना) निवृत्यात्मक… मौन (न झूठ, न सच)। मनोगुप्ति… आर्तध्यान में नहीं लगना। मुनि श्री प्रणम्यसागर

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अस्तित्व

दीवारों ने छत से कहा…तुम हम पर ही टिकी हो। छत ने कहा… तुम्हारी सुरक्षा मुझसे ही है। फर्श चुप ना रह सका बोला… मेरे

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मित्रता

मित्रता निभाने से पुण्यबंध। मित्रानुराग से कषाय, पापबंध। मुनि श्री अध्यात्ममणि सागर जी (व्रती श्री लालमणि जी वरैया, ग्वालियर)

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माँ

दीपक (माँ रूप) पूरे घर को प्रकाशित करता है, पर दिया तले अंधेरा (माँ अपना ध्यान नहीं रखतीं)। उस अंधकार को दूसरे दीपक दूर कर

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तत्व

कुण्डलपुर मंदिर जीर्णक्षीण तथा भूकंप से नुकसान होने पर नया बनाने की फैसले की, पुरातत्व विभाग ने आपत्ति की। आचार्य विद्यासागर जी… “आपका ध्यान पुरातत्व

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दान

दान अपने से बड़ों को…. जिससे उनकी पूज्यता बढ़े। ख़ुद पूज्य बनने को। पुण्यहीनों को सहयोग। व्यवहार में तो दान शब्द बहुत जगहों पर प्रयोग

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मंगल आशीष

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August 11, 2026