Month: August 2026
संसार
जन्म, बुढ़ापा, बीमारियाँ और मृत्यु दुःख यानि संसार ही दुःख है। समणसुत्तं गाथा – 55
हार / जीत
हराने से बेहतर है, जीत लिया जाए। राम रावण को हरा नहीं सकते थे, बुराई में, सो जीत गए अच्छाई में। कई बार हार कर
चार हाथ
खिड़की से 4 हाथ तक हरियाली दिखायी देती है, जंगलों में 4 K.M. आचार्य श्री विद्यासागर जी से एक वृद्ध ने शिकायत कि उन्हें दिखाई
वृद्धावस्था के लाभ
वृद्धावस्था के लाभ… सर्दी लगी/ छींक आयी, डबल कपड़े पहन लिए (युवाओं की तरह लापरवाही नहीं) समस्या समाप्त। गलती हुई, प्रायश्चित/ क्षमा माँगली, स्थिति सामान्य।
जीवन
जीवन बस यही है, अभी है, न भूत में न भविष्य में। दोनों अनंत (+ अनुबंध = अनंतानुबंधी)। भविष्य उधारी जैसा, लौट कर वापस आये
सिद्धांत
3 प्रकार के सिद्धांत – काल करे सो आज कर, आज करे सो अब….. आज करे सो कल कर, कल करे सो परसों….. आज का
आयुबंध
पहले चिंतन किया था की आयु के निषेक कम होते होते वृद्धावस्था में इतने कम हो जाते हैं कि जरा सा झटका आते ही पूरे
बंधन
क्या धर्म के नियम बंधन नहीं ? बंधन दो प्रकार के… जो पराश्रित करें/ दुःख दें, जैसे सांसारिक। दो… जो स्वआश्रित करें/ सुख दें, जैसे
प्रसन्नता
आज सब अपनों में संलग्न, अपनों को प्रसन्न करने में लगे रहते हैं। अपने को/ अपने लिए कुछ नहीं। माँ बच्चों की प्रसन्नता में ही
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